कविता : "पुस्तकें"
कविता : "पुस्तकें"
सच में बड़ी पवित्र होती है पुस्तकें,
हमारी सच्ची मित्र होती है पुस्तकें,
पुस्तक में समाया ज्ञान जहान का,
बच्चों की सचित्र होती है पुस्तकें।
ज्ञान का भंडार होती है पुस्तकें,
सारों का सार होती है पुस्तकें,
पुस्तक पथ प्रदर्शक हो हमारी,
आदर्श का आधार होती है पुस्तकें।
सच्चाई की आस होती है पुस्तकें,
सभ्यता का इतिहास होती है पुस्तकें,
पुस्तक ही बनाये आन बान पहचान,
संस्कृति का विश्वास होती है पुस्तकें।
कथा कविता गीत होती है पुस्तकें,
रस्म रिवाज रीत होती है पुस्तकें,
पुस्तक आईना होती समाज का,
सत्य अहिंसा प्रीत होती है पुस्तकें।
समस्या का हल होती है पुस्तकें,
कल आज कल होती है पुस्तकें,
पुस्तक दिखाती हर राह हमको,
सुंदर सरस सरल होती है पुस्तकें।
जीवन का उजाला होती है पुस्तकें,
सबक भी निराला होती है पुस्तकें,
पुस्तक में मन अपना लगा 'भारती'
ये गुरु सबसे आला होती है पुस्तकें।
