STORYMIRROR

niranjan niranjan

Classics

4  

niranjan niranjan

Classics

[कविता] पत्नी

[कविता] पत्नी

1 min
405

हर बातों को याद रखती है,

खुद को भूल कर हर किसी का ख्याल रखती हैं।

अपने परिवार को छोड़कर हम मे समां जाती है।

समझदार होकर भी पगली कहलाती है।

वह कोई और नहीं वह पत्नी होती है।


क्या खाना है, कब जाना है।

हर बातों का ध्यान रखती है।

लेट ना हो जाऊं मैं कहीं ऑफिस में,

मेरे से पहले उठकर मेरे जाने की तैयारी करती है।

हो जाता हूं गुस्सा उस पर मैं बहुत बार,

खुदा स्कार खुद में समा लेती है।

समझदार होकर भी वह पगली कहलाती है।

वह कोई और नहीं वह पत्नी होती है।


पूरे दिन खुद को व्यस्त रखती है।

कभी मम्मी पापा के साथ,

 तो कभी बच्चों के साथ व्यस्त रहती है।

हर काम को जल्दी से निपटाने की कोशिश करती है।

पूरे दिन घर के कामों में व्यस्त रहती हैं।

थक जाती है पूरे दिन के कामों से,

फिर भी वह बेपरवाह कहलाती हैं।

वह कोई और नहीं वह पत्नी होती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics