STORYMIRROR

Priya Charan

Thriller

4  

Priya Charan

Thriller

कविता की कला

कविता की कला

1 min
142

कोई गायाल समझता है

कोई शायर समझता है

कविता का सार तो

टूटे दिल वाला कलाकार समझता है

कहीं शब्दों की माला है

कहीं लफ़्ज़ों का मायाजाल है

कोई अल्फाज़ो को लिखता है

कोई किताबों की भाषा समझता है

कोई बिन कहे सब कुछ कह जाता है

कोई चीख़ कर भी आवाज़ न लगा पता है

कोई कविता सा छा जाता है

कोई ख़त सा संदूको में समाता है

कोई पुराने अख़बार सा रद्दी के भाव जाता है

कोई कालीदास सा ज्ञान का

सागर बन उभर आता है

हर कविता का सार कवि के


अंतर मन को दर्शाता है

मेरी इस कविता का श्रेय

मेरे पसंदीदा कवि कुमार

विश्वास जी को जाता है

सादर प्रणाम महान कवि को

जिनका हर शब्द मेरे दिल को छू जाता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Thriller