STORYMIRROR

Priya Charan

Abstract

4  

Priya Charan

Abstract

नारी करुणा का ज्ञान,

नारी करुणा का ज्ञान,

1 min
314

नारी करुणा का ज्ञान, प्रेम का रस पान

नारी वीरता का जीता जागता प्रमाण

नारी मानव जाति का अभिमान

नारी विश्व विख्यात ज्ञान

नारी हर कार्य का विस्तार

नारी शक्ति का वर्चस्व हैं, अपार,


नारी करुणा का ज्ञान, प्रेम का रस पान

नारी दो कुलो को जोड़ती,

प्रेम का धागा बन परिवार के हर मोती को पिरोती

पर आंख में आंसू आए तो,

न जाने क्यू अकेली ही कोने में रोती


माँ, बहन, बहू, बेटी, पत्नी सभी

रिश्ते हर खुशी से सींचकर निभाती,

फिर भी न जाने क्यू सम्मान वो ना पाती


नारी शक्ति करुणा का ज्ञान, प्रेम का रस पान

जगत जननी माँ अम्बे क्यों, सिर्फ नवरात्रि में पूजी जाती

क्यों कन्या भ्रूण हत्या के वक्त वो

तस्वीर किसीको नजर नहीं आती।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract