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ca. Ratan Kumar Agarwala

Abstract Inspirational

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ca. Ratan Kumar Agarwala

Abstract Inspirational

कवि और कविता

कवि और कविता

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नहीं हूँ मैं कोई कवि,

लिखता नहीं मैं कविता,

मन में आते जो भाव,

शब्दों की माला में पिरोता।


बहती ज्यों भावों की सरिता,

बन जाती यूँ ही कविता,

नही हूँ मैं कोई कवि,

नहीं लिखता मैं कोई कविता।

 

रहता हूँ मैं धरातल में,

नहीं उड़ता कल्पना की उड़ान।

नमन करता हूँ इस धरा को,

यह धरा ही है मेरा आसमान।

 

संसार की हर छोटी बात,

जगाती भावों की सरिता।

करता भावों को लिपिबद्ध,

लिपि बन जाती यूँ ही कविता।

 

नहीं हूँ मैं कोई कवि,

लिखता नहीं मैं कविता।

मन में आते जो भी भाव,

कागज पर स्याही से उकेरता।

 

शब्द बन जाते वाक्य,

वाक्य बन जाते यूँ ही कविता।

नहीं हूँ मैं कोई कवि,

नहीं लिखता मैं कोई कविता।

 

कविता तो है बस एक भाव,

भावों से निकल आती कविता।

कभी कविता देती कोई संदेश,

कभी बहती चाहतों की सरिता।

 

रच डाली वाल्मीकि ने रामायण,

कविता में बस गए राम और सीता।

महर्षि व्यास ने रची महाभारत,

लिख डाली रानी द्रौपदी की कथा।

 

नहीं थे वाल्मीकि कोई कवि,

था उनका जंगलों पर राज।

भावों ने बदल दिया मन,

रामायण बन गई उनकी आवाज।

 

वेद व्यास न थे कोई कवि,

नाम पड़ गया कृष्ण द्वैपायन।

रच डाले उन्होंने कई ग्रंथ,

भावों का कर डाला यूँ ही विश्लेषण।

 

रची महाभारत, रच दिए पुराण,

रच डाली महान भगवत गीता।

दे डाली अनायास ही उन्होंने,

संस्कारों की विशाल सरिता।

 

कोई कवि नहीं इनका सानी,

फिर भी लिखते सभी कविता।

इनमे से ही निकल आते कभी,

कई महान कवि और रचयिता।

 

नहीं हैं मेरा कोई वजूद,

नहीं हूं मैं किसीका सानी।

लिखता हूँ मैं तो बस यूँ ही,

मेरी कविता की यही कहानी।

 

नहीं चाहता बनूँ मैं कवि,

नहीं सोचता लिखूँ मैं कविता।

भावों को उकेरता पन्नों पर,

भाव बन जाते बस यूँ ही कविता।

 

लिखना बन गया मेरा स्वभाव,

लेखनी से हो गया स्नेह का नाता।

नहीं हूँ मैं कोई भी कवि,

लिखता नहीं मैं कोई भी कविता।

 

अजीब हो गई आज की दास्तान,

भावों की फिर बह गई सरिता।

मैं तो लिख रहा था यूँ ही कुछ,

शायद बन गई फिर एक कविता।

 

नहीं हूँ मैं कोई भी कवि,

लिखता नहीं मैं कोई भी कविता।

लिख डालें आप भी मन के भाव,

बन जाएगी बस यूँ ही कविता।


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