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Aman Barnwal

Abstract

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Aman Barnwal

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कुछ खूबसूरत सा पल

कुछ खूबसूरत सा पल

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चेहरे को हंसी दे गया दिल को खुशी दे गया

कुछ खूबसूरत सा पल आज बहुत कुछ दे गया।

याद दिला कर बचपन कीएहसास जगा अपनेपन की

पुरानी यादों को दोहरा तान नई यादें दे गया

कुछ खूबसूरत सा पल आज बहुत कुछ दे गया।

सर रखने को कंधे दे गया मन को चाहत के चंदे दे गया

तरसते थे जिसकी खातिर हमेशा हमें वहीं पल चुनिंदे दे गया

कुछ खूबसूरत सा पल अरमानों के पुलिंदे दे गया।

मां के हाथ का खाना दे गया।

भाभी का गुनगुनाना दे गया।

बचपन का कोई फसाना दे गया।

बच्चों को समय का बहाना दे गया।

कुछ खूबसूरत सा पलआज एक जमाना दे गया।


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