STORYMIRROR

Abhishek Pandey

Romance

4  

Abhishek Pandey

Romance

कुछ और दास्तां

कुछ और दास्तां

1 min
352

घर लौट चलते हैं अब बहुत दूर निकल आए हैं 

इसके आधे रास्ते भी तो तुमने नहीं बुलाया था 


दिन भर खुली आँखों में गुजरी रात लिए घूमते हैं 

नींद तो आई थी जब तेरी थपकियों ने सुलाया था


ये क्या हो गया है मुझे अजीब सी नाउम्मीद है  

तुम थे पास तो हमने नम आंखों से मुस्कुराया था


अफवाह है आजकल वो मेरी मौत की दुआ करता है

उसी ने तो मासूम निगाहें मिला जीना सिखाया था 


ये कौन लोग हैं मोहब्बत और शक साथ करते हैं 

झूठे इल्जामों का खंजर उसने सीने में उतारा था।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance