STORYMIRROR

Abhishek Pandey

Romance

4  

Abhishek Pandey

Romance

ख्वाहिशें

ख्वाहिशें

1 min
259

कुछ पल यु ही बिताने को 

मैं खवाब ऐसे देखता हु

किसी सुहानी शाम को

मैं तुम्हारे सिरहाने बैठा हूँ 


मेरी बातें हैं खत्म होने को 

तुम्हे जाने की जल्दी है 

साथ चलेंगे, भूल जाती हो 

अब मैं भी इसी शहर में रहता हू


करें याद पुरानी बातों को 

छेड़े थे जो तुमने सरगम 

उन पे गीत लिखने को 

मैं आज भी रातों में जगता हू 


कह लेने मुझे दो ज़माने को 

किस्सा तुम्हारी नादानी का 

मुस्कुरा के नज़रें झुकाने को 

मैं आज भी मोहबत्त कहता हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance