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Vaidehi Singh

Inspirational

4  

Vaidehi Singh

Inspirational

कठोर है पर प्यार है

कठोर है पर प्यार है

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वज्र जैसे मुसीबत और मेरे बीच खड़े होते हैं, 

बाहर से सबके सामने तो कठोर बड़े होते हैं। 

पर हृदय में प्रेम माँ जैसा ही रखते हैं, 

पर जताते हुए थोड़े कम ही दिखते हैं। 

कोमल मातृत्व में प्यार की भरमार है, 

पर पिता की डाँट, कठोर है पर उसमें प्यार है। 


सामने से चिंता नहीं दिखाते हैं, 

कभी अपना स्नेह नहीं जताते हैं। 

आधी रात को चुप-चाप कंबल ओढ़ा देते हैं, 

मुझे परेशान करने वाले को बस एक फूंक से उड़ा देते हैं। 

माना उनके बोले दस शब्दों में छः फटकार हैं, 

पिता का गुस्सा, कठोर है पर उसमें प्यार है। 


मेरे रहस्यों को पिता अधिक जानते नहीं हैं, 

मेरे विरुद्ध उलाहनों को कभी सच मानते नहीं हैं। 

मेरे रोने पर वो रोते नहीं, बस चुप हो जाते हैं, 

मेरी शुभरात्री सुने बिना, बस "सो जाओ" कहकर खुद सो जाते हैं। 

अजीब कहानियाँ पिता के पास हज़ार हैं, 

पिता कि सुनाई कहानी, निद्रा पर कठोर हैं पर उसमें प्यार है।


पिता को आज तक समझ ही कौन पाए हैं, 

मेरे खिलौने खोजने को उन्होंने ना जाने धूप के कितने थपेड़े खाए हैं।

बिना हार-जीत के अनगिनत खेल हमने खेले, 

पर मेरे हिस्से के दर्द भी बस उन्होंने ही झेले।

अगर मैंने उनको धन्यवाद नहीं कहा तो मेरा कुछ भी बोलना बेकार है, 

मेरी ऐसी बातों पर पिता का सिर्फ सिर हिलाना कठोर है पर उसमें प्यार है।



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