STORYMIRROR

Sukant Suman

Abstract Action

3  

Sukant Suman

Abstract Action

कशमकश की बस्ती।

कशमकश की बस्ती।

1 min
222

वो गाँव से आया है, शज़र ढूंढता है,

कशमकश की बस्ती में, सुकून ढूंढता है ।


लोगों ने चुन ली है रोजगार अपना,

वो नादां अब भी सरकारी नौकरी ढूंढता है।


होते जा रहे हैं लोग अब मतलबी,

वो कमबख़्त अब भी सच्चा-प्यार ढूंढता है। 


लूटा चुका है सारा दौलत अपना,

पर वो अब भी अख्त़़ियार ढूंढता है। 


मुक़ाबिल से भरी पड़ी है दुनिया,

वो अब भी उसमें रहनुमा ढूंढता है।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract