STORYMIRROR

Sukant Suman

Abstract Tragedy Classics

4  

Sukant Suman

Abstract Tragedy Classics

सिपाही का घर

सिपाही का घर

1 min
316

दरवाजे के उस पार

खड़ा डाकिया न जाने 

कब कौन-सा शुभ-अशुभ 

समाचार ले आए।


बस इसी उधेड़बुन में 

बीतता है उस माँ, बहन,पत्नी 

का जीवन।।

जिसका आखों का तारा 

खाती है गोलियां फिर भी


हँसते हुए करते हैं 

गुणगान जय हिंद का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract