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Shweta Rani Dwivedi

Inspirational

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Shweta Rani Dwivedi

Inspirational

कृत्रिमबुद्धिमत्ताएकउपकरण ,शिक्षक एक मार्गदर्शक

कृत्रिमबुद्धिमत्ताएकउपकरण ,शिक्षक एक मार्गदर्शक

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"कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक  उपकरण , शिक्षक एक मार्गदर्शक"

शिक्षक स्वयं एक दीया बनकर, पथ प्रदर्शक बन जाता है।
जीवन का मूल्य हमें वह, सही दिशा में सिखलाता है।।

एआई मात्र एक उपकरण है, जो शिक्षक का सहायक बनता है
बिना थमे व बिना रुके वह, तकनीक के रंग भरता है ॥

मानसिक स्तर बच्चों की, केवल शिक्षक ही तो पहचाने,
बच्चों के मन-वय की गहराई को एआई स्वयं क्या जाने?

सृजनात्मकता शिक्षक जगाता सदैव, छूटे हुओ का थामे हाथ |
ए.आई तो मात्र चित्र, वीडियो और सूचना संग ही देता साथ ॥

कक्षा में जा शिक्षक पहले प्रश्न पूछता फिर आगे बढ़ता |
सामूहिकता का भाव जगाकर, सामाजिक समझ का भाव गढ़ता ||

शिक्षक जब भी सृजनात्मकता से, एआई को जब अपनाता है ।
यह सदा एक टूल सरीखा, केवल उन्हीं के काम आता है ||

सृजनात्मकता व रचनात्मकता केवल शिक्षक के ही मन में आती है |
एआई से मात्र मदद, सूचनाओं की ही मिल पाती है।|

ए.आई का मति-मस्तिष्क नहीं तो वह सृजनात्मकता क्या कर पाएगा |
औरों से प्राप्त जानकारियों का बस जोड़ तोड़ ही कर पाएगा ||

धैर्य-शांति से ऑटिज्म के बच्चों को शिक्षक ही पाठ पढ़ा पाए ।
एआई मात्र एक टूल है वह सीधे संपर्क कहाँ साध पाए ।।

कम मानसिक स्तर वाले बच्चों के स्तर तक शिक्षक ही तो जा पाता है |
एआई तो मात्र टूल रूप में सूचनाएँ ही बतलाता है ||

मूल भावनाओं में जुड़कर ही शिक्षक बाल-मनोविज्ञान को जानता है |
भौतिक रूप से प्रत्यक्ष संबंध से वह, बच्चों को पहचानता है||

भावहीन एआई बच्चों के, मन को कभी न पढ़ पाएगा|
दर्द, संवेदना, आत्मीयता आदि मानवीय गुण का पाठ कभी ना पढ़ा पाएगा ||

कोविड काल में जब शिक्षक ने ऑनलाइन पाठ पढ़ाया था।
स्क्रीन की उस दूरी के चलते, भावनाएं जगा न पाया था ||

शिक्षक और छात्र मिलकर दोनों, एआई में जब आए |
सूचनाएं प्राप्त तो हुई बच्चों को, पर वे ज्ञान अर्जित न कर पाए||

प्रौद्योगिकी सदैव सीखने-सिखाने की क्षमता को सुगम बनाती है।
पर वास्तविकता की समझ सदा, मानवीय संबंधों से ही आती है।|

संस्कृति, समाज और पृष्ठभूमि की शिक्षक को ही होती है पहचान |
सरल में लेकर जटिल विषय का, देता सबको यथोचित ज्ञान ||

शिक्षक हेतु उपयोगी बनकर, ए.आई काम उनका आसान करे |
डेटा विश्लेषण, पाठ-योजना, अनुवादों का ध्यान धरे ||

कभी-कभार ए आई, जब त्रुटि पूर्ण जानकारी देता है।
शिक्षक अपनी समझ-बूझ से, उस त्रुटि को हर लेता है ||

शिक्षक का होता सतत् प्रयास यह, बच्चा सही विचार चुने।
एआई तो मात्र गलत सही सूचनाओं का ही अंबार चुने ||

"माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे,
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे।"

निर्मल- माटी सा बच्चा जब विद्यालय में आता है,
शिक्षक रचकर जीवन उनका, नैतिकता का पाठ पढ़ाता है।

ममता, प्यार और भावों में वह हर पल उन्हें संवारता है |
बिना भाव का एआई बच्चों की, रचनात्मक को मिटाता है।|



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