कर्म प्रधान
कर्म प्रधान
कहते हैं...किस्मत बड़ी बलवान
तो कर्म का कहाँ स्थान ?
अगर कर्म है प्रधान
तो किस्मत का क्या काम ?
इन दोनों विरोधाभास में हम सब हैं घिरे
सबके जुड़े हैं आपस में सिरे ,
आओ कर्म को किस्मत से जोड़ें
मिल कर सारी मिथ्याओं को तोड़ें ,
कर्म ही जीवन में महानजो ना समझे वो अज्ञान ।
