Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Goldi Mishra

Abstract


4  

Goldi Mishra

Abstract


कॉलेज के वो दिन

कॉलेज के वो दिन

1 min 218 1 min 218

वो दौर भी क्या दौर था,

यादों से भरा और मस्ती मोज का वो दौर था।

वो दिन कॉलेज के क्या दिन थे,

सभी दोस्त अपनी ही धुन में खोए रहते थे,

कभी कॉलेज के बाहर गप्पे मारना,

तो कभी केंटीन की गर्म चाय का लुफ्त उठाना।


वो दौर भी क्या दौर था,

यादों से भरा और मस्ती मोज का वो दौर था।

कोई कॉलेज में सपने लेकर आया था,

तो कोई कुछ कर दिखाने का हौसला,

कोई मस्तमौला था,

तो कोई गहरी खामोशी में डूबा।


वो दौर भी क्या दौर था,

यादों से भरा और मस्ती मोज का वो दौर था।

परिक्षा के दौरान एक अजीब हलचल सी हो जाती थी,

सलाना की पढ़ाई दिमाग से ओझल हो जाती थी,

रात दिन एक करके इम्तेहान की तैयारी करना,

और इम्तेहान के बाद एक अलग जश्न मनाना।


वो दौर भी क्या दौर था,

यादों से भरा और मस्ती मोज का वो दौर था।

फिर सब अलग अलग हो गए,

अपनी अपनी दुनिया बनाने में व्यस्त हो गए,

वो दोस्त और वो लम्हे बेहद खूबसूरत थे,

कॉलेज के दिन भी क्या दिन थे।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Goldi Mishra

Similar hindi poem from Abstract