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Suyesha Chavhan

Fantasy

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Suyesha Chavhan

Fantasy

कोई हमें भी तो, तुम सा बे-मिसाल चाहिए था ।

कोई हमें भी तो, तुम सा बे-मिसाल चाहिए था ।

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ना आने से हमारे,

अब भी चुप से बैठे हो तुम,

अमा यार, तुम्हें तो नाराज़ होना चाहिए था ।


अब हमें याद करके,

भला क्यों रो रहे हो तुम,

बिछड़ते वक्त, तुम्हें थोड़ा तो रो लेना चाहिए था ।


कहते हमसे तो यक़ीनन,

चले आते हम ख्वाब में तुम्हारे,

मुदस्सर हैं कि, कल रात तुम्हें सो जाना चाहिए था ।


धागे की डोर,

मोहब्बत ने थमाई थी हाथों में तुम्हारे,

बेशक, तुम्हें कुछ तो सीना-पिरोना चाहिए था ।


बाकियों की तरह,

तुम भी हाल पूछा करते हो हमारा,

पर, तुम्हें तो सब कुछ मालूम होना चाहिए था ।


तुम्हारी खामोशियों को हर दफा,

तोड़ने की जिम्मेदारी सिर्फ हमारी तो नहीं,

तुम्हें भी तो थोड़ा सा गुनगुनाना चाहिए था ।


खामोशियों में हमारी,

फर्क बस इतना सा था कि,

हमें बस तुम और तुम्हें सारा ज़माना चाहिए था ।


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