STORYMIRROR

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

4  

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

कोई हल नहीं मिलता रोने

कोई हल नहीं मिलता रोने

1 min
357

कोई हल नहीं मिलता रोने ओ रुलाने से ।

प्यार कम नहीं होता सिर्फ दूर जाने से।


सिर्फ़ तुम नहीं हो तो दिल कहीं नहीं लगता।

दिल सुकून पाता है सिर्फ तेरे आने से।


मजबूरियां रही होंगी तुमसे गर न मिल पाए।

बात समझ आएगी बाद में समझाने से।


आपसे शरारत भी आपसे शिकायत भी।

और प्यार बढ़ता है रूठने मनाने से।


आंसुओं से लिख दूंगा ज़ीस्त का फसाना मैं,

लफ़्ज़ मेरे पढ़ लेना आप भी बहाने से।


इंसान से मोहब्बत हो धर्म यह सिखाते हैं।

बाज क्यों नहीं आते लोग फिर लड़ाने से।


आफताब देता है दर्स यह जमाने को।

रोशनी ही बढ़ती है रोशनी लुटाने से।


मेरा नाम मत जोड़ो तुम किसी हसीना से।

मैं तो सिर्फ तेरा हूं पूछ लो जमाने से।


जिंदगी में गम है तो कल खुशी भी आएगी।

मत करो शिकायत तुम फिर कभी जमाने से।


हम तुम्हारे खातिर तो जान भी लुटा देंगे।

फायदा नहीं कोई मुझको आजमाने से।


रात है अंधेरी तो कल सुबह भी आएगा।

तम सगीर मिटता है इक शमा जलाने से।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance