STORYMIRROR

VanyA V@idehi

Tragedy

5  

VanyA V@idehi

Tragedy

कोई आएगा या नहीं?

कोई आएगा या नहीं?

1 min
11


आज फिर पंखे से झूल गई 

वह मासूम लड़की

जिंदगी से हारकर 

निरंतर झूल रही है

मेरे मस्तिष्क में और

मन में झूल रहे हैं

कई प्रश्न...


वह तो सहज, सरल,

सुमधुर मुस्कान की

मलिका थी

चंद घंटे पहले तक

हंसती खिलखिलाती

उस निर्मल प्राण ने

क्यों किया यह अपराध ?

हाँ, अपराध ही तो

कहती है इसे 

हमारी न्याय व्यवस्था !


असंख्य बच्चे, युवा और

अवसादी क्या सचमुच

करते हैं अपराध ?

या फिर शब्दों के 

धारदार और मारक 

हथियार

निष्ठुरता पूर्वक 

चला दिये जाते हैं

मन रूपी शरीर पर।

घायल हो जाती हैं

हृदय रूपी भावनाएँ

और बह जाता है

रक्त रूपी सारा विवेक !


नहीं, वे आत्महत्याएँ नहीं,

हत्या ही हैं... 

सुनियोजित और क्रूरतम !


कौन करेगा न्याय,

देगा दण्ड? 

ऐसे असंख्य

अपराधियों को !

जो कई बार होते हैं-

स्वयं अभिभावक,

शिक्षक, समाज, प्रेमी और

कोई निकट सम्बन्धी आएगा या नहीं !!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy