STORYMIRROR

Anita Sudhir

Abstract

4  

Anita Sudhir

Abstract

कोहरा

कोहरा

1 min
229

जब उष्णता में आये कमी

अवशोषित कर वो नमी

रगों में सिहरन का 

एहसास दिलाये

दृश्यता का ह्रास कराता 

सफर को कठिन बनाता है

कोहरा चारों ओर फैलता जाता है।


संयम से सजग हो

निकट धुंध के जाओ..

और भीतर तक जाओ

कोहरे ने सूरज नहीं निगला है

सूरज की उष्णता निगल 

लेगी कोहरे को।


सामाजिक, राजनीतिक

परिदृश्य भी त्रास से

धुंधलाता जा रहा 

रिश्तों की धरातल पर

स्वार्थ का कोहरा छा रहा

संबंधों की कम हो रही उष्णता

अविश्वास द्वेष की बढ़ रही आद्रता


कड़वाहट बन सिहरन दे रही 

विश्वास, प्रेम की किरणें 

लिए अंदर जाते जाओ

दूर से देखने पर 

सब धुंधला है

पास आते जाओगे 

दृश्यता बढ़ती जायेगी

तस्वीर साफ नजर आएगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract