कंचन काया बनी अंगार
कंचन काया बनी अंगार
यौवन पर छा गया है एक खुमार :
जबसे बारिश की पड़ी पहली फुहार !
अब प्रियतम के बिन रहा ना जाए :
गोरी पर प्रेम का ऐसा चढ़ा है बुखार !
काली बदरिया उमड़ घुमड़कर आए :
याद आए रह रहकर वो पहला प्यार !
किस से कहे गुजरिया हाल जिया की :
जों पिया आए तो खुलकर करे इजहार !
पीहू पपीहा बोले हिलावे जियरा के तार :
बार बार हिय में गूंजे पिया नमवां तोहार !
एक विरहन सी तड़प रही सजनियां बेचारी :
नयनन बहे नीर कंचन सी काया बने अंगार !
ई बैरन सवनवां और मोरी बाली उमरिया :
उ पर इ जुल्म कि जे बरसे बूँदवा लगातार!
अबहैं आ कै सुधि लई लो जी मोरे भरतार :
कि,तोरे बिना लागे ना कतई जियरा हमार !

