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V. Aaradhyaa

Romance

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V. Aaradhyaa

Romance

कंचन काया बनी अंगार

कंचन काया बनी अंगार

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यौवन पर छा गया है एक खुमार :

जबसे बारिश की पड़ी पहली फुहार !

अब प्रियतम के बिन रहा ना जाए :

गोरी पर प्रेम का ऐसा चढ़ा है बुखार !


काली बदरिया उमड़ घुमड़कर आए :

याद आए रह रहकर वो पहला प्यार !

किस से कहे गुजरिया हाल जिया की :

जों पिया आए तो खुलकर करे इजहार !


पीहू पपीहा बोले हिलावे जियरा के तार :

बार बार हिय में गूंजे पिया नमवां तोहार !

एक विरहन सी तड़प रही सजनियां बेचारी :

नयनन बहे नीर कंचन सी काया बने अंगार !


ई बैरन सवनवां और मोरी बाली उमरिया :

उ पर इ जुल्म कि जे बरसे बूँदवा लगातार!

अबहैं आ कै सुधि लई लो जी मोरे भरतार :

कि,तोरे बिना लागे ना कतई जियरा हमार !


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