कमाई
कमाई
कमाई ही
हम सबके
जीवन का
एकमात्र ज़रिया है,
जिसकी बदौलत
हमारा गुज़रबसर
संभव होता है।
कमाई के
दो ही विकल्प हैं --
एक सत्कर्मों की कमाई
और दुसरा पाप की कमाई।
हर इंसान के पास
दो ही रास्ते हैं --
एक सही
और दुसरा गलत।
अगर कोई इंसान
ईमान की कमाई पे
भरोसा रखता है,
तो बेहतर है।
मगर जब कोई इंसान
बेईमानी की कमाई करते-करते
बदतरीन जीवनशैली का
आदी हो जाता है,
वो बेशक़ दिन-ब-दिन
निरंतर स्खलन की
कगार पे
पहुंच जाता है..।
इसीलिए हमें
अपनी कमाई का
सही ज़रिया
तय करना
ज़रूरी है।
