Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

Jyoti Durgapal

Abstract


3  

Jyoti Durgapal

Abstract


कलम और ख्याल

कलम और ख्याल

1 min 349 1 min 349

एक कलम लिखती है कुछ कही

कुछ अनकही बात।

कुछ छुये कुछ अनछुये पल,

कुछ नयी कुछ पुरानी बातें।


कुछ हंसी के पल तो

कुछ दर्द के लम्हे,

कुछ कँपकँपाते पल

तो कुछ डराते चेहरे।


कलम की लिखावट लिखती है

भंवरे की गुंजन, नदियों की कलकल

करती आवाज तो कहीं लिखती है

सुनसान राहों की अनसुनी कहानी।


कुछ आसमान से ऊँचे सपने तो

कुछ हकीकत से जुड़े ख्वाब।

कलम की उड़ान ना रूकी है

ना झुकी है कभी चलती रहती है।

ना रूकने वाली उस डगर की तरह

जिस पर कुछ फूलों से सवाल है

तो कुछ कंटीले जवाब भी।


कलम किसी से कम नहीं

यह आज भी कायम और कल भी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Jyoti Durgapal

Similar hindi poem from Abstract