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sadhna Parmar

Abstract Crime Thriller

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sadhna Parmar

Abstract Crime Thriller

कितने आँसू और अभी

कितने आँसू और अभी

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दर्द-ए-ज़ख्म देकर तुम तो चले गए,

दर्द-ए-दिल छोड़कर तुम तो चले गए,


दर्द-ए-आँसू देकर तुम तो चले गए, 

मोहब्बत-ए-दर्द देकर तुम तो चले गए,


मैंनें तो तुम्हें भूलाकर जीना सीख लिया, 

लेकिन इन आँखों के आँसू तुम्हें अभी याद करते हैं। 


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