Amrita Singh
Fantasy
इश्क़ प्यार मोहब्बत
छोड़ो।
वादियों की सैर पर
चलो।
वादियों का किस्सा सुनने।
हलचल
तन्हाई
दशहरा
खुशियां
अधूरे से
तुम्हारी याद
बेटियां
किस्सा
बाल्यपन
बारिश का मौसम
भारत प्रकाशरत हो आए इस स्वतंत्र प्रण रहे दृढ़ होंगे प्रण नए। भारत प्रकाशरत हो आए इस स्वतंत्र प्रण रहे दृढ़ होंगे प्रण नए।
पर अब मेरे चक्कर में पड़ गया वो कहा कि उसे मुझसे प्यार होने लगा पर अब मेरे चक्कर में पड़ गया वो कहा कि उसे मुझसे प्यार होने लगा
प्रदूषण से फ्री चाहिए इंडिया हरियाली से हराभरा चाहिए इंडिया प्रदूषण से फ्री चाहिए इंडिया हरियाली से हराभरा चाहिए इंडिया
जो अनकही बात दरम्यान है अपनी वह सब कुछ सुनाना चाहता है। जो अनकही बात दरम्यान है अपनी वह सब कुछ सुनाना चाहता है।
खुद के ही ज़ख़्मों से ना जाने कब हम अऩज़ानें हो गए ? खुद के ही ज़ख़्मों से ना जाने कब हम अऩज़ानें हो गए ?
कभी आसमान में भी चमकता था नाम उनका आज वही सुनहरे अक्षर मिटे मिटे से लगते हैं। कभी आसमान में भी चमकता था नाम उनका आज वही सुनहरे अक्षर मिटे मिटे से लगते हैं।
जब भी यादों का दुशाला ओढ़ कर चलता हूँ मैं। जब भी यादों का दुशाला ओढ़ कर चलता हूँ मैं।
बूँद-बूँद तरसा जीवन को वो हसरतों का खुमार यूँ छाया। बूँद-बूँद तरसा जीवन को वो हसरतों का खुमार यूँ छाया।
गर कहा हमसे तो पी लूंगा इन्हें दर्दे दिल बयां करने का एक तो मौका दे दो। गर कहा हमसे तो पी लूंगा इन्हें दर्दे दिल बयां करने का एक तो मौका दे दो।
खुद से बिछड़ा.. खुद से हारा, टूटा तारा हूँ... जीवन के एकाकी------------- खुद से बिछड़ा.. खुद से हारा, टूटा तारा हूँ... जीवन के एकाकी-------------
जिंदगी बस ऐसे कटती जा रही है कभी जीने का मौका ना मिला। जिंदगी बस ऐसे कटती जा रही है कभी जीने का मौका ना मिला।
भारत के असंख्य जन, अब भी भूखे सोते हैं दूध दूध की रट लगाकर बच्चे अब भी रोते हैं भारत के असंख्य जन, अब भी भूखे सोते हैं दूध दूध की रट लगाकर बच्चे अब भी रोते ह...
तुझमें ही लागी लगन सब कुछ तुझको अर्पन। तुझमें ही लागी लगन सब कुछ तुझको अर्पन।
मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं इसीलिए रुलाती हो ना ! मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं इसीलिए रुलाती हो ना !
नफरत इस दुनिया की सह लेने दो बस थोड़ी और मोहब्बत कर लेने दो नफरत इस दुनिया की सह लेने दो बस थोड़ी और मोहब्बत कर लेने दो
इसी बात का है चाँद को खुद पर गुरूर, और हमें है अपनी मंज़िल पर पहुंचने का सुरूर। इसी बात का है चाँद को खुद पर गुरूर, और हमें है अपनी मंज़िल पर पहुंचने का सुरू...
अमरप्रेम दया के सागर तुम हो नटखट नयनोंवालें। अमरप्रेम दया के सागर तुम हो नटखट नयनोंवालें।
माना कि काफ़िर हम कहलाएंगे, प्यार धोखा है,, ऐलान फिर भी हम ये कर जाएंगे ! माना कि काफ़िर हम कहलाएंगे, प्यार धोखा है,, ऐलान फिर भी हम ये कर जाएंगे !
बस उसी क्षण से ही सोचने के दायरे बदल जाएंगे। बस उसी क्षण से ही सोचने के दायरे बदल जाएंगे।
हर दिन बस सावन आये बस हर रोज सेवन आये। हर दिन बस सावन आये बस हर रोज सेवन आये।