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Amrita Singh

Romance


3  

Amrita Singh

Romance


तुम्हारी याद

तुम्हारी याद

1 min 198 1 min 198

हर शाम तुम्हारी याद 

बाट जोहती है ,

कब आओगे तुम 

ये मुझसे पूछा करती है ।

तकती है राहे तुम्हारी 

मनमानियां ये किया 

करती है ।

हर शाम तुम्हारी याद 

बाट जोहती है ,

कब आओगे तुम 

ये मुझसे पूछा करती है ।

लगता है वही कहीं थम

सी गई है शाम भी

शायद वो अपने घर

जाना भूल गई है ।

हर शाम तुम्हारी याद 

बाट जोहती है ,

कब आओगे तुम ये

मुझसे पूछा करती है ।

ढलना था शाम को

रात के आगोश में 

पर शायद कहीं वह

ढलना भूल चुकी है ।

हर शाम तुम्हारी याद 

बाट जोहती है ,

कब आओगे तुम 

ये मुझसे पूछा करती है । 

कब आओगे तुम ये मुझसे

पूछा करती है ।



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