मधुशिल्पी Shilpi Saxena
Abstract
किसने रोका है तुम्हें
एक झलक दिखलाओ न
बनकर के इन्द्रधनुष
आसमान में छाओ न
सतरंगी छटाओं को
आकर के बिखराओ न
गम की घटाएँ बरस चुकीं
अब तो तुम मुस्कुराओ न
एक बार तो फिर से तुम
जलवा अपना दिखलाओ न।
हिंदी दिवस
मेरा भारत
माँ
मिट्टी का इंस...
देरी
जब सब बदल जाए
कही अनकही
गहराई प्रेम क...
लेखन
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें। अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें।
बेदर्द और ईर्ष्यालुओं को क्या काम है उनसे। जो नेक दिल हैं उन्हें हर बार मिलेंगे।। बेदर्द और ईर्ष्यालुओं को क्या काम है उनसे। जो नेक दिल हैं उन्हें हर बार मिलें...
शक की आंधी चली अनेकों रिश्ते धराशाई। शक की आंधी चली अनेकों रिश्ते धराशाई।
और जीवित रखते हैं डूबा हुआ एक पूरा संसार। और जीवित रखते हैं डूबा हुआ एक पूरा संसार।
वो सुकूँ वाला फिर शाम दे एक हसीं अब अंजाम दे. वो सुकूँ वाला फिर शाम दे एक हसीं अब अंजाम दे.
बदल गए हैं सब लेकिन बदला नहीं ये सूरज-चाँद। बदल गए हैं सब लेकिन बदला नहीं ये सूरज-चाँद।
अकेला था वो और अब रावण अनगिनत। अकेला था वो और अब रावण अनगिनत।
नशा बना लें परोपकार का इसी नशे में जीना अच्छा लगता है। नशा बना लें परोपकार का इसी नशे में जीना अच्छा लगता है।
ख्वाहिश है नीलगगन में उन्मुक्त उड़ान भरने की l ख्वाहिश है नीलगगन में उन्मुक्त उड़ान भरने की l
हर रस्म निभाना तू ही सिखाती, मर के देती कस्मों को प्राण। हर रस्म निभाना तू ही सिखाती, मर के देती कस्मों को प्राण।
देश की आज़ादी खातिर आजीवन लड़ते रहे देश की आज़ादी खातिर आजीवन लड़ते रहे
घमंडी सभी हो गए हैं सुनो, मुझे आज कोई सफाई न दे घमंडी सभी हो गए हैं सुनो, मुझे आज कोई सफाई न दे
पहला प्यार बिल्कुल मौसम की तरह होता है, कैसे मौसम पल में बदल जाता है। पहला प्यार बिल्कुल मौसम की तरह होता है, कैसे मौसम पल में बदल जाता है।
झूठ को सच में बदलने पे तुले हैं तलवारें लेकर कुछ "किसान" निकले हैं। झूठ को सच में बदलने पे तुले हैं तलवारें लेकर कुछ "किसान" निकले हैं।
वो सपने गुज़र गए इन आँखों में कुछ इस तरह हर ख़्वाहिश इस दिल की बेमानी लगने लगी है. वो सपने गुज़र गए इन आँखों में कुछ इस तरह हर ख़्वाहिश इस दिल की बेमानी लगने लगी ...
तिरंगा लिए हाथ में हाईकमान का आशीर्वाद लिए साथ में। तिरंगा लिए हाथ में हाईकमान का आशीर्वाद लिए...
लगे ऐसा जैसे आज है होली और दिवाली ठुुमक ठुमक थिरकती अपनों की टोली। लगे ऐसा जैसे आज है होली और दिवाली ठुुमक ठुमक थिरकती अपनों की टोली।
सबके नजर का चश्मा अलग-अलग होता है. सबके नजर का चश्मा अलग-अलग होता है.
"हाय अबला तेरी यही कहानी, अंचल में है दूध आंखों में पानी।" "हाय अबला तेरी यही कहानी, अंचल में है दूध आंखों में पानी।"
दिन सारा तो बीत गया इस मरु को पार करते-करते। दिन सारा तो बीत गया इस मरु को पार करते-करते।