किस्मत की किताब
किस्मत की किताब
किस्मत की किताब क्या
सभी की एक जैसी
कौन सुखी पूर्ण
राजा हुआ या रंक
चक्रवर्ती नरेश के सुत
अवतार श्री विष्णु के
अवध के नरेश राम
कितने सुखी रहे जीवन में
लीला पुरुषोत्तम भी
गीता के वक्ता भी
कितना रोये जीवन में
प्रेम कब पूर्ण हुआ था
सोलह हजार रानियों का दिखावा
फिर भी प्रेम कब मिला
सिद्धार्थ तज गृह
बोध पा बुद्ध बन गये
ज्ञान भी दिया क्या
दुख है जीवन में
किस्मत की किताब में
कुछ सुख तो कुछ गम हैं
दिन के बाद रात भी
सुबह भी और शाम भी
खुद भगवान न लिख पाये
किस्मत अपनी किस्मत की किताब में
ज्ञान तितिक्षा के दे गये
गीता अध्याय चार में
सर्दी, गर्मी, सुख और दुख
आते और जाते हैं
कर्म निष्काम करके
योगी जीवन जीते हैं
रोना किस्मत का तो
कमजोर ही रोते हैं
साहसी कर्म रथ हो आरूढ़
समर जग जीतते हैं
