STORYMIRROR

Hassan Bilal

Abstract

4  

Hassan Bilal

Abstract

किसान आज

किसान आज

1 min
275

मेहनत नहीं खून बहाया था मैंने

पसीना नहीं लहु बहाया था मैंने।।


तुम खाते थे मेरा अन्न।

अब खिलाते हो दंड।। 


याद नही कब सीखा था हँसना

याद नही कब खिला था फूल।।


तुम काला धन ना ला सके

लियाऐ ये कानून।।


मेहनत नहीं खून बहाया था मैंने 

पसीना नहीं लहू बहाया था मैंने।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract