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Hassan Bilal

Abstract

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Hassan Bilal

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मंज़िल दूर की

मंज़िल दूर की

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पूरे सफर में चुनोतियाँ भारी हैं

कोई नही हम सफर

लड़ना है खुद मुुझे

कूद गया हूं आग की लपट में

कोई नही बचाने वाला

बचना है खुद यहाँ

निकल कर जाना है वहाँँ

जहाँ मंज़िल है। 


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