Dr. Diptiranjan Behera
Tragedy Fantasy
कुछ लिखने के खयाल आया तो तुम याद आये
तुम याद आये तो बस तुम्हीं याद आये।
ये तो बस बहाने ही था तुम्हे याद करने का
हम भूले कब थे जो अब याद आये।
सारे बहाने भी कम है यादों के आगे
बताओ भुलाऊँगा तो भुलाऊँगा कैसे।
हुनर
खयाल
आसा
माँ
क्यों नहीं
मिलता रहता हू...
बिन कहे
बदलो भेस
अन्नाजी में आ गई, फिर थोड़ी-सी जान, क्या अनशन को भी भला, सुन लेगा सुल्तान ?१ अन्नाजी में आ गई, फिर थोड़ी-सी जान, क्या अनशन को भी भला, सुन लेगा सुल्तान ?१
टुकड़े-टुकड़े हो बिखर गई है आज नदी मर गई है। टुकड़े-टुकड़े हो बिखर गई है आज नदी मर गई है।
अंततः बच जाता है एक काला और अंधा सच। अंततः बच जाता है एक काला और अंधा सच।
ताउम्र अपनों की दी हुई ये नेमत है, जीने के लिए इतना दर्द कोई कम तो नहीं। ताउम्र अपनों की दी हुई ये नेमत है, जीने के लिए इतना दर्द कोई कम तो नहीं।
आपदाओं में भी अवसर खोजना यह कला भी देश ने पहचान ली! आपदाओं में भी अवसर खोजना यह कला भी देश ने पहचान ली!
आंखों से बहते आंसू में भी उसको मुस्काना है बहानों के आंचल में हर दर्द भी उसे छुपाना है आंखों से बहते आंसू में भी उसको मुस्काना है बहानों के आंचल में हर दर्द भी उसे ...
पूर्णिमा के चमकते चाँद को वो अमावस मे ढूँढने जाते हैं। पूर्णिमा के चमकते चाँद को वो अमावस मे ढूँढने जाते हैं।
मंडी में बिकने लगें, स्त्री-पुरुष जवान पूंजी पर बैठा यही, चाह रहा सुल्तान । मंडी में बिकने लगें, स्त्री-पुरुष जवान पूंजी पर बैठा यही, चाह रहा सुल्तान ।
हुआ है निष्ठुर मनु का पूत, ध्वंस की जारी है करतूत ! हुआ है निष्ठुर मनु का पूत, ध्वंस की जारी है करतूत !
लहू से लथपथ उसकी देह की, हर रग-रग चिल्लायी लहू से लथपथ उसकी देह की, हर रग-रग चिल्लायी
लेखक हर रहस्य का ज्ञाता जो लिख दे प्रमाण बन जाता, लेखक हर रहस्य का ज्ञाता जो लिख दे प्रमाण बन जाता,
अहा! बिल्कुल जैसे सपनों में सजाया था स्वर्ण की चमक जिसपर सौंदर्य आभा था अहा! बिल्कुल जैसे सपनों में सजाया था स्वर्ण की चमक जिसपर सौंदर्य आभा था
कैसा अभागा है बेचारा लोन ले लेकर के अपना काम चलाता है कैसा अभागा है बेचारा लोन ले लेकर के अपना काम चलाता है
हम पढेंगें तो, नेताओं की नेतागिरी कैसे चलेगी। हम पढेंगें तो, नेताओं की नेतागिरी कैसे चलेगी।
अपने अस्तित्व को जाहिर करने के लिये देखते हैं मुझे टकटकी लगाए अपने अस्तित्व को जाहिर करने के लिये देखते हैं मुझे टकटकी लगाए
दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !! दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !!
फिर भी वो.. शीतलहर की चिर निद्रा में सो गया। फिर भी वो.. शीतलहर की चिर निद्रा में सो गया।
ठूंठ बन मैं खड़ा, अंचम्भित सा ठगा सा। ठूंठ बन मैं खड़ा, अंचम्भित सा ठगा सा।
देते हैं फरमान यही सब राजा हो या रानी । तज खेती कर ले मजदूरी, छोड़ अरे नादानी ! देते हैं फरमान यही सब राजा हो या रानी । तज खेती कर ले मजदूरी, छोड़ अरे नाद...
सड़क खोद खाई करीं, आते दिखे किसान देख लिया इस देश ने, ऐसा भी सुल्तान । सड़क खोद खाई करीं, आते दिखे किसान देख लिया इस देश ने, ऐसा भी सुल्तान ।