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Varsha Divakar

Classics

4  

Varsha Divakar

Classics

ख्वाब....

ख्वाब....

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ख्वाबो मे गुम हो जाना हमारी  आदत नहीं.....


हकीकत से रूबरू होना पसंद है हमारी 🥰


जमीं पे रह... चाँद सितारों को


पाने की चाहत नहीं हमारी🌚🌚🌚🌚✨✨✨


हमें यूँ सपनो में खोने की चाहत नहीं 😊


मिल जाये कहीं अपनो सा प्यार......


हर रिश्ता संभाल रखने की चाहत हमारी


झुठ बोलकर अच्छा बनने की चाहत नही हमारी


यूँ झूठे वादे करने की फितरत नहीं हमारी 🥰


कभी लगे  दिल दुखा है वजह से हमारी
कही दूर उन रिश्तों से  चले जाना  आदत है हमारी
यूँ तो नहीं कहती...... हर किसी के लिए खास हूँ मै
बस इतना जानती हूँ... मेरी नजर में हर एक रिश्ता अनमोल है मेरे लिए 🌹
मै ये नही जानती...... मुझसे बँधे हर रिश्ता रहे...
पर इतनी चाहत है मेरी..... मै हर रिश्तों से बंधी रहूँ
कभी लगे मैं हूँ गलत.... तब मेरे कान पकड़
कोई कह सके...... तू गलत है 😇
मेरी गलतियों को कोई छुपाए ये चाहत नहीं मेरी

मेरी  गलतियों से कोई रूबरू कराये यही चाहत है मेरी


यूँ तो सबके जुबां से मेरी तारीफ पसन्द नहीं मुझे


पर हाँ...... अपने पापा के जुबाँ से तारीफ सुनने की बेसुमार कोशिशे रहती हैं मेरी 🥰


हर किसी के जुबां से तारीफें सुनना


इस दिल को  पसन्द  नहीं.......


किसी का चेहरा देख... उसके खूबसूरती का


बखान करना फितरत नहीं है हमारी......


खूबसूरत दिल वाले लोगो की


तारीफ करना चाहत है हमारी 💝


चेहरों से मीठे और दिल से फीके लोगों से


कहीं बेहद दूर अकेले  रहना पसन्द है हमे ☺


यूँ तो फितरत नही हर किसी से बात करने की हमारी


पर जहाँ लगे किसी से कुछ अच्छी  

सीख मिल सकती हैं

उस जगह हम अच्छाई सीखने की

चाहत रहती है हमारी........✍️


अपने कर्मो को अच्छा बनाने की चाहत है हमारी
सच्चाई से रूबरू होने की आदत है हमारी......

          ✍️ वर्षा रानी दिवाकर 🥰


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