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सोनी गुप्ता

Abstract

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सोनी गुप्ता

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ख्वाब

ख्वाब

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रात के उस अंधेरे में जहाँ ख्वाब उतरते हैं, 

हर ख्वाबों में उनके सुनहरे सपने सजाते हैं, 


भूल जाऐंगे सब जब वो आऐंगे हमसे मिलने, 

ढूंढती निगाहें उनकी राहों को हम तकते हैं, 


दिल के किसी कोने में जो जगह है उनकी, 

दिल में उनके ख्वाबों के अरमान सजते हैं, 


ख्वाबों की जो सुंदर बगिया हमने सजाई है, 

उस बगिया में अब प्रेम के फूल खिलते हैं। 



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