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मिली साहा

Inspirational

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मिली साहा

Inspirational

खुशियों की कोई दुकान नहीं होती

खुशियों की कोई दुकान नहीं होती

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खुशियों की कोई दुकान नहीं होती, जहांँ से इसे खरीद लाएँ,

खुशियांँ तो होती अनमोल,आखिर कैसे इसका मोल लगाएंँ।


दिल से ढूंँढकर तो देखो खुद के अंदर है खुशियों का जहान,

जीवन के हरक्षण में खुशियाँ फिर क्यों बने फिरते अनजान।


सुख में हैं सभी मुस्कुराते,दुःख में भी देखो ज़रा मुस्कुराकर,

एक बार देखो, छोटी-छोटी खुशियों की, महफ़िल सजाकर।


छटेंगे निराशा के बादल, खुशियों की धूप खिल खिलाएगी,

मुश्किल परिस्थितियों में भी ज़िंदगी आसान नज़र आएगी।


दो पल की ज़िन्दगी, बटोर लो जितनी खुशियांँ बटोर सको,

जियो हरपल ऐसे जैसे यही ज़िंदगी का पल सबसे खास हो।


सुख दुख जीवन के दो पहलू इनका आना जाना लगा रहेगा,

खुशियाँ वही समेट पाये जो दुःख में भी मुस्कुराकर जिएगा।


माना कि कभी-कभी ज़िन्दगी में, मोड़ आ जाते बड़े कठिन,

पर हर समस्या का हल भी है यहीं बस खुद पर रख यकीन।


समस्याओं से घबराकर, अनमोल क्षणों को क्योंकर गंवाना,

बीत जाते हैं जो पल फिर संभव कहाँ, उनका वापस आना।


खुशियों को बनाकर हमजोली, जी लो हर पल गुनगुनाकर,

खुशियाँ अंदर ही विद्दमान, थोड़ा देखो खुद को टटोलकर।।


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