STORYMIRROR

Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Abstract

3  

Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Abstract

ख़ुशियों की जड़

ख़ुशियों की जड़

1 min
673

समंदर से निकली थी 

थी बड़ी प्यारी 

ले आए हम घर पर 

बच्चे देख उसको 

हुए बहुत ख़ुश 

माँ ने जब देखा तो 

लिया सर पकड़ और बोली - 

" कहाँ से ले आए इस बला को तुम" ? 

कहा हमने - "समंदर से निकली थी 

यह बड़ी प्यारी । तुम्हीं ने कहा था समंदर से जो 

निकले ले आना उसे घर ।" 

माँ बोली - "रहा तू निरा मूर्ख 

कहा था मैंने लेकर के कुछ अनोखा सा आना 

तू ले आया पेड़ की जड़ 

क्या है इसमें अनोखा बता दे ज़रा यह भी तू मुझको ।" 

मैं बोला - "यही तो है संसार में 

ख़ुशियों भरी पेड़ की जड़ ।"



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract