SHWETA GUPTA
Abstract
दर्द की स्याही,
गम की कलम
और
बदकिस्मती के कागज़ पर
सोचा चंद खुशियाँ लिखूँ...
बेदर्द ज़माना
यह देख न सका
दर्द, गम, बदकिस्मती
छीन ली
अब खुशियाँ लिखती नहीं
खुशियाँ जी रही हूँ...
वह कौन?
दो सौ वर्ष
गुल्लक
प्रकृति माँ क...
मैं मोदी हूँ
अभिमन्यु के उ...
गर्मी की छुट्...
मैं सैनिक नही...
क्या यह विकास...
वंदे मातरम्
है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला। है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला।
आज उसी 'पिस्तौल' का वंदन करने का शुभ दिन है। आज उसी 'मर्दानी' का पूजन करने का शुभ दिन आज उसी 'पिस्तौल' का वंदन करने का शुभ दिन है। आज उसी 'मर्दानी' का पूजन करने का...
न जाने क्यों शहरों में अब पड़ोसी दिखाई नहीं देते। न जाने क्यों शहरों में अब पड़ोसी दिखाई नहीं देते।
ईश्वर भी माँ माँ ईश्वर के रूपों की पहचान है । माता बड़ी महान है लोगों माता बड़ी महान ह ईश्वर भी माँ माँ ईश्वर के रूपों की पहचान है । माता बड़ी महान है लोगों माता बड...
नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई। नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई।
गिली मिट्टी की खुशबू भी इस धरा से आती है अपने बच्चों को खुश देखकर भारत माता मुस्काती है गिली मिट्टी की खुशबू भी इस धरा से आती है अपने बच्चों को खुश देखकर भारत माता मुस...
किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का
आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अपमान सती स आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अप...
डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे। डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे।
था ये कारगिल युद्ध जो भारतीय सेना ने, हिमालय की ऊंची चोटियों पर लड़ा था। था ये कारगिल युद्ध जो भारतीय सेना ने, हिमालय की ऊंची चोटियों पर लड़ा था।
क्या भूल गए आप हमारे लल्ला पे हुआ जो दानव प्रहार। क्या भूल गए आप हमारे लल्ला पे हुआ जो दानव प्रहार।
जीवन का अंजाम है, होता सबका अंत । बनना सबको राख है, साधु और क्या संत ।। जीवन का अंजाम है, होता सबका अंत । बनना सबको राख है, साधु और क्या संत ।।
पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।। पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।।
आगे पीछे मत देखना घर में बहन तेरी भी जवान है। आगे पीछे मत देखना घर में बहन तेरी भी जवान है।
इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी। इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी।
छोटी सी नहर मे बहते पानी की शान्ति ने आज कहा मुझसे कि तेरा गाँव अब बदल रहा है छोटी सी नहर मे बहते पानी की शान्ति ने आज कहा मुझसे कि तेरा गाँव अब बदल र...
जिन्हें जेलों में होने था, देश के ठेकेदार वो बन बैठे है जिन्हें जेलों में होने था, देश के ठेकेदार वो बन बैठे है
माँ, तेरे आँचल का वो पहला एहसास याद है। माँ, तेरे आँचल का वो पहला एहसास याद है।
बूढ़ी मां... जिसने शायद कुछ सालों पहले खाना पकाना छोड़ दिया था वह पकवान बनाती है बूढ़ी मां... जिसने शायद कुछ सालों पहले खाना पकाना छोड़ दिया था वह पकवान बनाती है
मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही... मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही...