खुमारी
खुमारी
रात की खुमारी में
दिन का है इंतजार
सुबह से शाम तक
आईना दिखाता वक्त
बस इतना सा सवाल
होगा क्या, अब आगे।
आगे की तलाश में
भूल गये पीछे का
बस गलती यही हुई
अब किसको पता
होना क्या है आगे
सही-गलत की खोज
उलझ गये इस कदर
याद नहीं रहा अब
अपना कौन पराया
सत्य की खोज में
झूठ से मन लगाया
फंस गये जाल में
रात की खुमारी में
उजाले का इंतजार
नहीं मालूम अब
खत्म होगा की नहीं।
