Surendra kumar singh
Abstract
खुल गया है
वो दरवाजा जो
सदियों से बन्द था।
कितना अद्भुत लगता है
मनुष्य
और उसकी मनुष्यता
एक अपराजेय शक्ति की तरह।
संवाद 3
एक पल
तुम्हारे आगोश...
चलते चलते
तुम्हारा होना
एहसास
आज
चलो
सुबह है
अभी किनारा बड़ा सुदूर कितने पास व कितने दूर, अभी किनारा बड़ा सुदूर कितने पास व कितने दूर,
तेरे सम्मुख घबराये मन, जैसे दे रहा परीक्षा हो ! तेरे सम्मुख घबराये मन, जैसे दे रहा परीक्षा हो !
माँ के आँखों से गिरूं तो ममता के आंसू हूँ मैं माँ के आँखों से गिरूं तो ममता के आंसू हूँ मैं
नाम जप राम जप जपता रह तू राम शुद्ध समर्पण का संज्ञान लक्षित प्रभु परम धाम। नाम जप राम जप जपता रह तू राम शुद्ध समर्पण का संज्ञान लक्षित प्रभु परम धाम।
एक बार के बिछुड़े फिर मिलते नहीं। टूटे हुए फूल डाली में पुनः लगते नहीं एक बार के बिछुड़े फिर मिलते नहीं। टूटे हुए फूल डाली में पुनः लगते नहीं
मिट्टी की सौंधी महक, हवा में घुली मिठास, मिट्टी की सौंधी महक, हवा में घुली मिठास,
बिगड़ेगा कुछ भी नहीं आप मानिए मित्र, बिगड़ेगा कुछ भी नहीं आप मानिए मित्र,
कर्तव्य पूरे करके ही करें हम, मांग खुद अपने अधिकार की। कर्तव्य पूरे करके ही करें हम, मांग खुद अपने अधिकार की।
जाति सभी की पूछते, अपने नेता जी रोज। पूछी उनकी जाति तो, अभी रहे हैं खोज।। जाति सभी की पूछते, अपने नेता जी रोज। पूछी उनकी जाति तो, अभी रहे हैं खोज।।
उलझनों का सिलसिला बस उलझता रहा यादों के झरोखों से देखता भी रहा। उलझनों का सिलसिला बस उलझता रहा यादों के झरोखों से देखता भी रहा।
विनय हमारी शिव बाबा जी निश्चय ही सबका स्वीकार करें। विनय हमारी शिव बाबा जी निश्चय ही सबका स्वीकार करें।
हर हर बम बम गूँज रहा है। समझो शिव का धाम वहाँ है।। हर हर बम बम गूँज रहा है। समझो शिव का धाम वहाँ है।।
तभी तो रोज रोज नये नये क़र्ज़ का बोझ बढ़ाता जा रहा है। तभी तो रोज रोज नये नये क़र्ज़ का बोझ बढ़ाता जा रहा है।
दुनिया में सब इंसान एक समान नहीं कोई बहुत गरीब हैं तो कोई धनवान हैं। दुनिया में सब इंसान एक समान नहीं कोई बहुत गरीब हैं तो कोई धनवान हैं।
अपनी तकलीफों, अपनी बीमारी से अपनी शक्तियों खो रहा सरे- आम है अपनी तकलीफों, अपनी बीमारी से अपनी शक्तियों खो रहा सरे- आम है
आजादी के पर्व पर, आप करें संकल्प। उन्नति पथ पर देश हो, अंतिम यही विकल्प।। आजादी के पर्व पर, आप करें संकल्प। उन्नति पथ पर देश हो, अंतिम यही विकल्प।।
यहां तक कि अपने लिए भी नहीं, सब ढोते हैं खुद को मजदूर की तरह यहां तक कि अपने लिए भी नहीं, सब ढोते हैं खुद को मजदूर की तरह
नफ़रत इससे कभी न करना। मरने से भी कभी न डरना।। नफ़रत इससे कभी न करना। मरने से भी कभी न डरना।।
वे हैं हमारे महान सैनिक जो इस भूमि पर जन्म लिए। वे हैं हमारे महान सैनिक जो इस भूमि पर जन्म लिए।
जैसी भी है दुनिया, इसी में हमको जीना करना होगा इसको, दिल से हमें स्वीकार जैसी भी है दुनिया, इसी में हमको जीना करना होगा इसको, दिल से हमें स्वीकार