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नविता यादव

Inspirational

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नविता यादव

Inspirational

खुद बन प्रेरणा

खुद बन प्रेरणा

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काली अंधेरी रात छा गई

दूर मंज़िल नजर न आई

डर गई, घबरा गई

एकदम हिम्मत हार बैठ गई।।


आया एक फरिश्ता दूर कहीं से

रिश्ता था नहीं कोई उससे

पर जीने के तरीके सीखा गया वो मुझे।।


बना प्रेरणा मेरी

मुझे मुझसे मिला गया,

तब से अब, जब मैं अपने आप को देखती हूं,

खुद को अलग एक रूप में पाती हूं।।


अब अपने हर एक बदलाव को अपनी प्रेरणा मानती हूं

दिन - प्रतीदिन मैं अपने आप को और निखारती जाती हूं।।

किसी और के दर्द से सिखती हूं,

किसी और को हिम्मत कर आगे बढ़ देख सिखती हूं।

अपनी ही कविताओं को पढ़, आए इंपरूवमेंट को देख सिखती हूं।


अपने आप को यूं बदला हुआ देख,

मैं अपने जीवन के हर एक मोड़ से कुछ न कुछ सिखती रहती हूं।।


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