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Praveen Gola

Inspirational

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Praveen Gola

Inspirational

खट्टे रिश्ते

खट्टे रिश्ते

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पल में अपनो ने अपनो को रुलाया,

उन्हे पराया होने का एहसास दिलाया,

रिश्तो में ऐसी चुभन जब दिल को जलाये,

खट्टे रिश्ते नाम का नया शब्द ज़हन में आये।


आजकल ये शब्द बड़ा बढ़चढ़ कर इतराता है,

रिश्तो की मिठास को सिर्फ इतिहास में पाता है,

जहाँ भाई - भाई के खून का प्यासा है,

वहीं बहन - भाई का रिश्ता टूटता नज़र आता है।


माता - पिता भी स्वार्थी होकर जी रहे,

अपने बच्चों के हकों को बेवजह छीन रहे,

बच्चे भी अपने ही माँ - बाप को आँख दिखाते हैं,

बेशर्म बन उनको खूब अदालतों के चक्कर कटवाते हैं।


दौलत और शोहरत के पीछे भाग रहे कलयुगी लोग,

सतयुग को पीछे छोड़ कितने दुखों को रहे भोग,

इसी खटास के कारण ही तो आये दिन अपराध बढ़ रहे,

सब खंजर एक दूसरे की पीठ में अपने ही कस रहे।


अब मकानों से नहीं आती वो प्यार भरी मीठी आवाजें,

चिल्लाते लोगों का शोर अक्सर ढंकते बैंड और बाजे,

इसलिये गर हो सके तो अब भी समय है सुधरने का,

अपने खट्टे रिश्तों को चुपके से मीठे में बदलने का।।


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