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Mahesh Kumar

Abstract

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Mahesh Kumar

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खोटा सिक्का

खोटा सिक्का

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भुला खुद को यार कही तू, चल कर ले अब याद

खोटा सिक्का ही रहता है, सदा अपनों के साथ


तुझ में भी है आग छुपी वो, जो जलती है दिन-रात

सूझ-भुझ के माप-तोल ले, अपनी किस्मत अपने हाथ


भुला खुद को यार कही तू, चल कर ले अब याद

खोटा सिक्का ही रहता है, सदा अपनों के साथ


खूब कमा के धन जुटाया, अपनों से न मिलने आया

रह गई यादों की एक बारात, छुटी दुनिया छुटा साथ


भुला खुद को यार कही तू, चल कर ले अब याद

खोटा सिक्का ही रहता है, सदा अपनों के साथ।


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