Mahesh Kumar
Action Crime
यहाँ चोर-चोरी समझता नहीं,
वह अक्सर समझाना पड़ता है।
कानून की किसको जरूरत है,
मगर समाज बचाना पड़ता है।
पहल की भूल
प्रार्थना
समाज
घर की रानी
जलन
गीत: दौर-ए-मु...
कैसा तलाक
नाप-तौल
(गीत: माँ हिं...
मजबूर किसान ह...
सलिल सी सदा अविरल बहना अन्याय, झूठ कदापि न सहना सलिल सी सदा अविरल बहना अन्याय, झूठ कदापि न सहना
नशे का सुरूर है हर कोई लगेगा तुझे यूँ अपना। नशे का सुरूर है हर कोई लगेगा तुझे यूँ अपना।
आज उसने तुम्हें रोने ना दिया कल तुम उसे ना रोने देना। आज उसने तुम्हें रोने ना दिया कल तुम उसे ना रोने देना।
पूर्व आकाश में हो या पश्चिम की उन पर्वतों से घिरी क्षितिज रेखा में, पूर्व आकाश में हो या पश्चिम की उन पर्वतों से घिरी क्षितिज रेखा में,
कभी उमंग से भरा यह जीवन, कभी वीराना सा लगता है। कभी उमंग से भरा यह जीवन, कभी वीराना सा लगता है।
मेरी स्मृतियों को याद करेगा एक तस्वीर में टांग दी जाऊँगी मैं और फिर.... मेरी स्मृतियों को याद करेगा एक तस्वीर में टांग दी जाऊँगी मैं और फिर....
राम का अवतार लेकर रावण पापी का अंत किया, राम का अवतार लेकर रावण पापी का अंत किया,
गुनाह ए जिन्दगी कभी फर्ज नही होती गुनाह ए जिन्दगी कभी फर्ज नही होती
जो होता अच्छे के लिए होता , सोच मेरी ये फिर एक बार थी आयी। जो होता अच्छे के लिए होता , सोच मेरी ये फिर एक बार थी आयी।
पदचिन्ह भी तेरे है ऐसे, असंख्य कदम जहां अनुसरण करे।। पदचिन्ह भी तेरे है ऐसे, असंख्य कदम जहां अनुसरण करे।।
बस डूबा हुआ है आपका विशेष जीवन ... बस डूबा हुआ है आपका विशेष जीवन ...
दीवानों के दिल खुश होते हैं महबूबा के इशारों में दीवानों के दिल खुश होते हैं महबूबा के इशारों में
लेकर प्रभु के, हाथ का साथ जिसमें मिल जाए, हर एक श्वास लेकर प्रभु के, हाथ का साथ जिसमें मिल जाए, हर एक श्वास
ललसाए बड़ी चढ़ी, मानवता के विरुद्ध है ललसाए बड़ी चढ़ी, मानवता के विरुद्ध है
हौसला रख बुलंद, विश्वास को टूटने न देना , टेढ़े- मेढ़े रास्ते पर भी अगर चलना आता है हौसला रख बुलंद, विश्वास को टूटने न देना , टेढ़े- मेढ़े रास्ते पर भी अगर चलना ...
यह केवल खोल नहीं है यह है उनका सुरक्षा कवच! यह केवल खोल नहीं है यह है उनका सुरक्षा कवच!
प्रकृति को चाहिए एक सुदृढ़ आवरण, उसे बचाएं तभी बनेगा सुन्दर पर्यावरण प्रकृति को चाहिए एक सुदृढ़ आवरण, उसे बचाएं तभी बनेगा सुन्दर पर्यावरण
पहले तो एक ही जयचंद विभीषण थे घर-घर में जयचंद विभीषण भरे हुए पहले तो एक ही जयचंद विभीषण थे घर-घर में जयचंद विभीषण भरे हुए
दूर किसी के परिवार का हिस्सा हमेशा वह बनता। दूर किसी के परिवार का हिस्सा हमेशा वह बनता।
जवान को लाख रूपये ही, खिलाड़ी को करोड़ों रुपये। जवान को लाख रूपये ही, खिलाड़ी को करोड़ों रुपये।