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Shubhra Varshney

Inspirational

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Shubhra Varshney

Inspirational

खिलखिलाता बचपन मेरा

खिलखिलाता बचपन मेरा

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खिलखिलाते बचपन मेरा खिलखिलाते बच्चे,

स्कूल को जाते हम सब मिलकर दिन थे कितने अच्छे।


अठन्नी चवन्नी बहुत थी तब आते दोने भर के,

इंटरवल में चीजें खाते लाते घर से सिक्के।


हिंदी साइंस तो अच्छे लगते रहे गणित से बचते,

क्रोध में तो टीचर रहते धरते घुसे मुक्के।


इंटरवल का पीरियड छोटा खेले कब हम बच्चे,

पढ़ाई में तो आगे बढ़ गए रहे खेल में कच्चे।


स्कूलों में ही मित्र बन गए बिन विज्ञापन खर्चे,

पाकर इनको धन्य हो गए मिले जैसे हीरे पन्ने।


गुरु ज्ञान से नेक बनी हम कर रहे सेवा हृदय से सच्चे,

इंजीनियर डॉक्टर कुछ वैज्ञानिक बन गए इरादे थे जिन जिने के पक्के।


स्कूल से ही नैतिकता पा गए हर कृत्य राष्ट्र को समर्पित करते,

एक दिन भारत विकसित हो जाएगा रहेगा जाएंगे सब हक्के बक्के।


विश्व गुरु बनेगा भारत होंगे कई चंद्रयान अंबर पर,

अलग ग्रह पर होंगी बातें, भारत का नाम होगा विश्व पटल पर।


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