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मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Drama

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मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Drama

ख़ुद की साल गिरह पर

ख़ुद की साल गिरह पर

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उम्र के इस दौर में यह हाल है

दिल में सुकूँ, रग़ों में उबाल है !


मुट्ठी में समेटी ज़िन्दगी का

फ़िसल चला एक और साल है !


यह साल-गिरह मनाना भी

अपने आप में एक सवाल है !


ना मुस्तक़बिल में बची खुशी

और न माज़ी पे ही मलाल है !


जिए जाते हैं मगर फिर भी

यह भी क्या कम कमाल है !


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