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Rudra Prakash Mishra

Tragedy

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Rudra Prakash Mishra

Tragedy

कहाँ गए वो

कहाँ गए वो

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ना दिखती पीपल की छाँव ,

ना दिखता अब प्यारा गाँव।

बारिश तो अब भी होती ,

पर ना दिखती कागज़ की नाव।

रोज सुनाती एक कहानी ,

कहाँ गई वो दादी- नानी।

कहाँ गईं वो सारी परियाँ ,

अद्भुत , अनदेखी अनजानी।

ना दिखती चन्दा मामा की ,

वो चाँदी की एक कटोरी।

नहीं सुनाती अम्मा भी अब ,

वो प्यारी सी लल्ला लोरी।

बच्चे तो अब भी हैं ,

पर अब ना है वो प्यारा सा बचपन।

आपाधापी - भागम दौड़ी ,

ने छीना हम सब का जीवन।


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