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Harshita Dawar

Abstract

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Harshita Dawar

Abstract

कौन समझे

कौन समझे

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कौन समझे

कौन समझाएं।


जिसने जितना जाना

उतना ही पहचाना।


जिसने जैसे जाना

वैसे ही पाया।


हम खुद को अभी भी

पहचान रहे हैं।


दुनिया ने तो

फैसले भी सुना दिए।


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