कौन देगा संदेश
कौन देगा संदेश
मृदु मधुमास का परिहास तजकर
कौन भीगा प्यार लेगा?
माल मोती की मसल का
आसुओं का हार लेगा।
संदेश मुझको सुन सकोगी
क्यों अधूरे गीत गाऊं।।
सृष्टि सरिता आधार में
बहता हुआ तृण बे- सहारा
स्नेह सुखा दीप हूं मैं
भोर का बस एक तारा।।
सिकन कितनी हर परत में
क्या छुपा लूं क्या बताऊं।।
अनिखिल नित फूल मेरा
लौट जाती है बहारे
स्वास की सूनी डगर में
नाम ले किसकर पुकारे।
रात के आए बिना ही
चांदनी कैसे बिछाऊं।।
विघुच्छटा के हीन बादल
नीर का अंबार ढोता
दूरियां शायद समेटे
है रूदन में हास सोता।
झूलता खुद सूलियों पर
और को भी क्यों झुलाऊं।।
