Bikramjit Sen
Fantasy
काश ज़मीन आसमान से टकरा जाता
काश बादलों के ऊपर, घर मैं बनाता
काश, ये दिन आ जाता ,
जब कोई किसी को नीचा नहीं दिखाता
हर ख्याल ऊँचा होता,
सबकी सोच ऊंचाई को छूता
सब कुछ ऊँचा हो जाता
एक आवाज़
अपनाया
कर्म
मैने पाया है
फासले
मज़ाक
आत्म चिंतन
संदेह का बीज
अब मैं क्या क...
वो क्यों नहीं...
मेरी कराहती स्मृतियों पर मरहम की बात है। मेरी कराहती स्मृतियों पर मरहम की बात है।
गुमनाम हुआ करती थी। चलो ले चलो फिर से मुझे उसी दौर में। गुमनाम हुआ करती थी। चलो ले चलो फिर से मुझे उसी दौर में।
मेरे मंदिर ना जाकर मस्जिद जाने से क्या होगा? क्या भगवान और अल्लाह में लड़ाई होगी? मेरे मंदिर ना जाकर मस्जिद जाने से क्या होगा? क्या भगवान और अल्लाह में लड़ाई होगी...
अपने मन की बात लिखना क्या आसान होता है? मन मे न जाने कितने सारे रंग भरे होते है.... अपने मन की बात लिखना क्या आसान होता है? मन मे न जाने कितने सारे रंग भरे होते है...
अपितु करता हूँ आपसे आह्वान, ह्रदय से कर इसका सम्मान। अपितु करता हूँ आपसे आह्वान, ह्रदय से कर इसका सम्मान।
हक़ीक़त में अब शिकारियों ने अंदाज़ ही नहीं बल्कि अपने हथियार भी बदल दिये हैं। हक़ीक़त में अब शिकारियों ने अंदाज़ ही नहीं बल्कि अपने हथियार भी बदल दिये हैं।
हर बुलंद सफर का कभी तो विश्राम तय है। हर बुलंद सफर का कभी तो विश्राम तय है।
वह अब जान चुकी है कि किसी भी घर में रोटियाँ तो बनाना होगा वह अब जान चुकी है कि किसी भी घर में रोटियाँ तो बनाना होगा
देखो मैं मर रहा हूँ यहाँ, तुम बचा लोगी क्या ? देखो मैं मर रहा हूँ यहाँ, तुम बचा लोगी क्या ?
फबती है बड़ी तुम्हारी ये बड़ी बड़ी अखियां गौरी, करती हो श्रृंगार कौन सा अपनी इन अंखियन फबती है बड़ी तुम्हारी ये बड़ी बड़ी अखियां गौरी, करती हो श्रृंगार कौन सा अपनी ...
मकर संक्रांति में गंगा उस पार से मेरे साथ में पतंग का पेंच लड़ाओगे? मकर संक्रांति में गंगा उस पार से मेरे साथ में पतंग का पेंच लड़ाओगे?
वो भर दो ना, "शकुन" फासले जो दरमियाँ हैं, कुछ कम कर दो ना। वो भर दो ना, "शकुन" फासले जो दरमियाँ हैं, कुछ कम कर दो ना।
जो कुछ उलझे-बिखरे, फटे पन्नों से दिखते हैं उन्हें यादों की गठरी में बांध रख देती हूँ जो कुछ उलझे-बिखरे, फटे पन्नों से दिखते हैं उन्हें यादों की गठरी में बा...
वो परीक्षा हाल में चुप बैठना मौका मिलते ही दाएं बाएं झांकना बड़ा याद आता है वो परीक्षा हाल में चुप बैठना मौका मिलते ही दाएं बाएं झांकना बड़ा याद आता है
तो क्या होगा ? कुछ नहीं और रह जायेगा केवल एक शून्य। तो क्या होगा ? कुछ नहीं और रह जायेगा केवल एक शून्य।
कहीं भीतर से मुझे खोखला ना कर दें। देख लेना .......... कहीं भीतर से मुझे खोखला ना कर दें। देख लेना ..........
मेरे दिन की शुरुआत करती तुम और वो चाय का प्याला। मेरे दिन की शुरुआत करती तुम और वो चाय का प्याला।
एक दूसरे के साथ बनारस की गलियों में घूमना बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दर्शन को एक दूसरे के साथ बनारस की गलियों में घूमना बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के ...
एक सुंदर रिश्ता हम दोनों के बीच फिर इन भावनाओं से बन जाती है एक सुंदर रिश्ता हम दोनों के बीच फिर इन भावनाओं से बन जाती है
बिना इरशाद के उसको बे-सुर में कोई कलाम सुनाया जाये। बिना इरशाद के उसको बे-सुर में कोई कलाम सुनाया जाये।