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Simmi Bubna

Abstract

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Simmi Bubna

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काश आज आप होते

काश आज आप होते

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काश आज आप होते तो बात कुछ और होती, 

किसी और की नहीं, बस आपकी ही जरूरत होती।


काश आज भी सुबह कोई पुकार पाता, 

काश आज भी कोई पुचकार सकता, 

काश आज आप होते तो बात कुछ और होती, 

किसी और की नहीं, बस आपकी ही जरूरत होती।


हाथ में फोन नहीं, चाय की प्याली होती, 

दिलो में कड़वाहट नहीं, चाय की मिठास होती, 

काश आज आप होते तो बात कुछ और होती, 

किसी और की नहीं बस आपकी ही जरूरत होती।


घर में हिस्से नहीं, प्यार के अफसाने होते, 

दिलो में दूरियाँ नहीं, नजदिकियाँ होती, 

काश आज आप होते तो बात कुछ और होती, 

किसी और की नहीं बस आपकी ही जरूरत होती।


अधूरे सपने नहीं, पूरी मंजिल होते, 

आँखों में आश नहीं, विश्वास होता, 

काश आज आप होते तो बात कुछ और होती, 

किसी और की नहीं बस आपकी ही जरूरत होती।


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