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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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कारवां

कारवां

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टूटे पर, 

कब, जाने,

कहां-कहां गिर जाएंगे।

घर से टूटे रिश्ते,

जाने कैसे,

कहां-कहां बिखर जाएंगे।


हम आगे और पीछे यादों का कारवां चल रहा होगा।

छोटी-छोटी बातों का हिसाब मिल रहा होगा ।

एहसास हैं कई।

एहसासों का मिला जुला काफिला चल रहा होगा 


मन मेरे क्यों कर रिपु हो चला।

 खुद से ही अब बगावत कर चला।


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