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Jyoti Astunkar

Abstract Others

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Jyoti Astunkar

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काले बादल

काले बादल

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काले बादलों के आज मिजाज़ ज़रा अच्छे हैं

दिल करता है आज के दिन रुक ही जाएं

आज शनिवार तो कल रविवार ही तो है

मैं भी जरा एक मनोवार मना ही लूं


जी भर के जी लूं

जी भर के बरस लूं

मौसम को ज़रा रंगीला कर दूं

और दिलों को ज़रा ठंडक दे दूं


भीगे भीगे से माहौल में

लोगों को ज़रा कुछ याद दिला दूं

गीली गीली सड़क पर दोस्तों से मिलकर 

वड़ा पाव और चाय का मंज़र याद करा दूं


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