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Nand Lal Mani Tripathi pitamber

Classics Fantasy Inspirational

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Nand Lal Mani Tripathi pitamber

Classics Fantasy Inspirational

काल समय

काल समय

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काल समय हूँ

अतीत वर्तमान 

भविष्य हूँ अतीत का 

दर्पण वर्तमान का 

अपर्ण हूँ।।

देखे है कितने ही 

युग ना जाने 

देंखे है पुरुषार्थ पराक्रम 

युद्ध शांति के वीर धीर 

योद्धा गुरुतर गम्भीर

मैं पुरुषोत्तम का पौरुष हूँ

ना जाने कितने सारे 

मैं व्यख्या हूँ  

अपने ही पल प्रहर कि 

आख्या हूँ।।

ऋषि महर्षि तप ज्ञान वैराग्य

ध्यान धन्य कि दृष्टि

सृष्टि और समर्पण हूँ।।

शिवि दधिज कर्ण जरासंध

दानी दुर्वाशा कश्यप वशिष्ट

सांदीपनि विश्वामित्र भार्गव

श्रृंगी व्यास वाल्मीकि जाने

कितने ही है पल प्रहर अतीत

के चमक हमारे।।

महाप्रलय  साक्षी मैं

मनु सतुरूपा ब्रह्मा कि सृष्टि

मानस पुत्रो और 

नारायण जल जीवन

भी हमने देखने है जाने

काल समय हूँ।।

ध्रुव प्रह्लाद मधुकैटभ हृरण्य

कश्यपु हिरण्याक्ष रावण 

कुंभकर्ण कंस दंतवक्र शिशुपाल

सब मेरे ही आदि अनंत के अंश

पल प्रहर चुनौती हूँ।।

राम कृष्ण परशुराम वामन 

नरसिंह वाराह कच्छप मेरे ही

खण्ड देव दानव जाने पहचाने

देव हूँ।।

संघर्ष चुनौतियों की ज्वाला हूँ

पथ पराक्रम जीवन अंगार 

अग्निपथ हूँ ।।

पल प्रहर पथ परीक्षा हूँ

उद्देश्य विहीन निरर्थक हूँ 

उद्देश्यों उद्भव हूँ।।

कायर का अंत हूँ

इच्छाओ का अंतर्मन 

अनन्त हूँ आत्म बोध 

संतोष का ईश्वर आदि

ईश्वर सर्वज्ञ हूँ।।


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